नए वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिजली की नई दरें तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) 17 फरवरी से सार्वजनिक सुनवाई करेगा। इस सुनवाई में बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित टैरिफ (दर) पर उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी।
क्यों हो रही है सुनवाई
हर वर्ष नए वित्तीय वर्ष से पहले बिजली वितरण कंपनियां आयोग के सामने नया टैरिफ प्रस्ताव प्रस्तुत करती हैं। इसमें वे बिजली उत्पादन लागत, वितरण खर्च, रखरखाव, सब्सिडी और अन्य खर्चों के आधार पर बिजली दरों में संशोधन का प्रस्ताव देती हैं।
आयोग इन प्रस्तावों की समीक्षा करता है और उपभोक्ताओं की राय लेने के बाद नई दरों को अंतिम रूप देता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि दरें उचित और संतुलित हों तथा उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न पड़े।

पहले दो दिन होगी ऑनलाइन सुनवाई
17 और 18 फरवरी को क्षेत्रीय स्तर पर उपभोक्ताओं की ऑनलाइन सुनवाई की जाएगी, ताकि राज्य के अलग-अलग जिलों के लोग आसानी से अपनी बात रख सकें।
17 फरवरी का शेड्यूल
- सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक – दुर्ग के उपभोक्ता
- दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक – बिलासपुर के उपभोक्ता
- दोपहर 3 बजे से शाम 4:30 बजे तक – राजनांदगांव के उपभोक्ता
18 फरवरी का शेड्यूल
- सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक – अंबिकापुर के उपभोक्ता
- दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक – जगदलपुर के उपभोक्ता
- दोपहर 3 बजे से शाम 4:30 बजे तक – रायगढ़ के उपभोक्ता
इन ऑनलाइन सुनवाई में घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
19 और 20 फरवरी को रायपुर में ऑफलाइन सुनवाई
ऑनलाइन सुनवाई के बाद 19 और 20 फरवरी को राजधानी रायपुर स्थित आयोग कार्यालय के कोर्ट रूम में ऑफलाइन सुनवाई आयोजित की जाएगी। इसमें:
- बिजली कंपनियों द्वारा दिए गए टैरिफ प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा होगी
- उपभोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि और सामाजिक संगठन सीधे आयोग के सामने अपनी आपत्तियां और सुझाव रख सकेंगे
- आयोग सभी पक्षों की बात सुनकर अंतिम निर्णय लेगा
क्या हो सकता है असर
इस सुनवाई के बाद आयोग बिजली की नई दरों की घोषणा करेगा, जो नए वित्तीय वर्ष से लागू होंगी।
नई दरों का असर इन पर पड़ेगा:
- घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल
- व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खर्च
- उद्योगों की बिजली लागत
- कृषि उपभोक्ताओं की बिजली दर
अगर दरों में बढ़ोतरी होती है तो बिजली बिल बढ़ सकते हैं, जबकि दरों में राहत मिलने पर उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर
यह सुनवाई उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मौका है, क्योंकि वे सीधे आयोग के सामने अपनी समस्याएं और सुझाव रख सकते हैं। इससे बिजली दर तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी और जनहितकारी बनती है।
