नई दिल्ली। कॉमेडियन समय रैना का शो ‘India’s Got Latent’ एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस बार विवाद किसी आपत्तिजनक मजाक को लेकर नहीं, बल्कि शो में पहुंचे एक तंजानियाई छात्र द्वारा भारत में मिलने वाली सरकारी स्कॉलरशिप और स्टाइपेंड से जुड़े कथित खुलासे को लेकर है। छात्र की बात का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ भारतीय टैक्सपेयर्स ने सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं। इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वीडियो में छात्र ने जो दावा किया, उससे यह अपने-आप साबित नहीं होता कि वह किस विशेष सरकारी योजना के तहत लाभ ले रहा था या उसने भारत सरकार से मिली राशि का कितना हिस्सा अपने परिवार को भेजा। इसलिए वायरल क्लिप के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित छात्र की स्कॉलरशिप और योजना की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ‘India’s Got Latent’ के एक वीडियो क्लिप से हुई। इसमें शो में पहुंचे तंजानिया के एक छात्र से उसकी पढ़ाई और कमाई से जुड़े सवाल पूछे गए।
वायरल क्लिप में छात्र ने कथित तौर पर बताया कि उसे भारत में पढ़ाई के दौरान भारत सरकार की ओर से स्कॉलरशिप और मासिक स्टाइपेंड मिलता है। बातचीत के दौरान उसने यह भी बताया कि वह मिलने वाली राशि में से कुछ पैसे बचाकर तंजानिया में अपनी मां को भेजता है।
यही बात सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य कारण बन गई। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब भारत में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा, हॉस्टल, फीस और अन्य खर्चों को लेकर आर्थिक दबाव का सामना करते हैं, तो विदेशी छात्रों को सरकारी सहायता देने की जरूरत क्यों है।
भारतीय टैक्सपेयर्स क्यों नाराज हुए?
वायरल वीडियो सामने आने के बाद कुछ भारतीय टैक्सपेयर्स ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई। उनका तर्क है कि सरकार को सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में सबसे पहले भारतीय नागरिकों की शिक्षा और जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे सवालों में मुख्य रूप से यह शामिल है कि:
- विदेशी छात्रों को भारत सरकार की ओर से छात्रवृत्ति क्यों दी जाती है?
- इस योजना के लिए धन कहां से आता है?
- क्या ऐसी स्कॉलरशिप भारत की शिक्षा नीति का हिस्सा है?
- क्या विदेशी छात्रों को मिलने वाली राशि का उद्देश्य भारत में रहकर उनकी पढ़ाई और जीवन-यापन का खर्च पूरा करना है?
- क्या छात्र को मिलने वाली राशि को विदेश में परिवार को भेजने की अनुमति है?
इन सवालों के चलते मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
क्या भारत सरकार विदेशी छात्रों को स्कॉलरशिप देती है?
यह दावा कि विदेशी छात्रों को भारत सरकार की ओर से स्कॉलरशिप नहीं दी जाती, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
भारत का Indian Council for Cultural Relations (ICCR) विभिन्न देशों के छात्रों के लिए आधिकारिक छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित करता है। ICCR के मुताबिक हर साल अलग-अलग योजनाओं के तहत लगभग 180 देशों के विदेशी छात्रों को 3,000 से अधिक स्कॉलरशिप दी जाती हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि भारत और दूसरे देशों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना भी है।
ICCR की योजनाओं में विदेशी छात्रों के लिए UG, PG और PhD स्तर की पढ़ाई के अवसर शामिल हैं।
विदेशी छात्रों को स्टाइपेंड भी मिलता है
ICCR की 2026-27 की आधिकारिक गाइडलाइन के मुताबिक पात्र विदेशी स्कॉलरशिप छात्रों को पाठ्यक्रम के स्तर के अनुसार मासिक स्टाइपेंड दिया जाता है।
उदाहरण के तौर पर मौजूदा गाइडलाइन में:
- UG छात्रों के लिए: ₹18,000 प्रति माह
- PG छात्रों के लिए: ₹20,000 प्रति माह
- PhD छात्रों के लिए: ₹22,000 प्रति माह
के मासिक स्टाइपेंड का प्रावधान है। इसके अलावा कुछ श्रेणियों में हाउस रेंट अलाउंस और अन्य भत्ते भी निर्धारित हैं।
इसलिए शो में छात्र द्वारा भारत सरकार से स्टाइपेंड मिलने की बात सैद्धांतिक रूप से भारत की मौजूदा विदेशी छात्रवृत्ति व्यवस्था से मेल खाती है, लेकिन वायरल वीडियो से यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि वह छात्र ICCR की किस योजना में था।
सरकार विदेशी छात्रों पर पैसा क्यों खर्च करती है?
विदेशी छात्रों को छात्रवृत्ति देने की नीति को केवल आर्थिक सहायता के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। भारत लंबे समय से शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को कूटनीतिक संबंधों का हिस्सा बनाता रहा है।
ICCR की छात्रवृत्ति योजनाओं में विभिन्न देशों के विद्यार्थियों को भारत में पढ़ने का अवसर मिलता है। इसका उद्देश्य उन्हें भारतीय शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ भारत की संस्कृति और समाज से परिचित कराना भी है।
इस तरह की योजनाएं भारत के soft power और international educational diplomacy का भी हिस्सा हैं।
क्या छात्र को मिलने वाला पैसा परिवार को भेजने की अनुमति है?
यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण और अभी अस्पष्ट हिस्सा है।
वायरल क्लिप में छात्र के कथित बयान से यह सामने आता है कि वह स्टाइपेंड में से कुछ राशि बचाकर अपनी मां को भेजता है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि संबंधित योजना के नियमों के तहत ऐसा करना पूरी तरह अनुमत है।
ICCR की आधिकारिक गाइडलाइन में स्टाइपेंड को छात्रों के भारत में रहने और पढ़ाई के दौरान उनके खर्चों को पूरा करने के लिए दिया गया बताया गया है।
इसलिए किसी एक वायरल क्लिप के आधार पर यह कहना कि भारत सरकार विदेशी छात्रों को पैसा विदेश भेजने के लिए देती है, भ्रामक हो सकता है। इसके लिए संबंधित छात्र की योजना, उसके नियम और उसके मामले की वास्तविक जानकारी सामने आना जरूरी है।
स्कॉलरशिप सिर्फ विदेशी छात्रों के लिए नहीं, बल्कि एक व्यापक नीति का हिस्सा
भारत में विदेशी छात्रों को स्कॉलरशिप देने की व्यवस्था कोई अचानक शुरू हुई नीति नहीं है। ICCR के तहत कई अलग-अलग योजनाएं चलती हैं। इनमें General Scholarship Scheme के अलावा Commonwealth देशों, श्रीलंका और विभिन्न Cultural Exchange/Educational Exchange Programmes से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं।
इसका उद्देश्य भारत को उच्च शिक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक बनाना और दूसरे देशों के साथ शैक्षणिक संबंध मजबूत करना है।
सोशल मीडिया पर दो पक्षों में बंटी बहस
इस मामले पर सोशल मीडिया में मुख्य रूप से दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पहला पक्ष सवाल उठा रहा है कि जब भारतीय विद्यार्थी शिक्षा के खर्च, फीस और हॉस्टल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं, तब विदेशी छात्रों को सरकारी धन से स्टाइपेंड देना उचित क्यों है।
दूसरा पक्ष यह तर्क दे रहा है कि विदेशी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप भारत की आधिकारिक विदेश नीति और शैक्षणिक कूटनीति का हिस्सा है। ऐसे कार्यक्रमों से भारत के दूसरे देशों के साथ संबंध मजबूत हो सकते हैं और विदेशी छात्र भारत के बारे में सकारात्मक अनुभव लेकर अपने देश लौटते हैं।

‘टैक्सपेयर्स का पैसा’ वाले दावे को समझना जरूरी
इस विवाद में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा सवाल है—“टैक्सपेयर्स का पैसा विदेशी छात्र को क्यों दिया जा रहा है?”
यह सवाल राजनीतिक और नीतिगत बहस का विषय हो सकता है, लेकिन इसे समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि सरकार की विदेशी छात्रवृत्ति योजनाएं बजट और विदेश नीति के व्यापक ढांचे का हिस्सा हैं।
ICCR स्वयं बताता है कि वह विभिन्न योजनाओं के तहत विदेशी छात्रों को छात्रवृत्ति देता है। इसलिए विदेशी छात्र को भारत सरकार से स्कॉलरशिप मिलना अपने-आप में कोई अनियमितता नहीं है।
भारत में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के लिए नियम भी हैं
ICCR के नियमों के मुताबिक स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को भारत में अपनी पढ़ाई और उपस्थिति से संबंधित शर्तों का पालन करना होता है। उदाहरण के तौर पर 2026-27 की गाइडलाइन में भारत से बाहर रहने की अवधि को लेकर भी नियम निर्धारित किए गए हैं और निर्धारित सीमा से अधिक विदेश में रहने पर स्कॉलरशिप भत्ते में कटौती का प्रावधान है।
इससे स्पष्ट है कि स्कॉलरशिप केवल बिना शर्त मिलने वाली राशि नहीं है, बल्कि इसके साथ नियम और पात्रता भी जुड़ी हुई है।
‘India’s Got Latent’ फिर क्यों आया चर्चा में?
समय रैना का ‘India’s Got Latent’ पहले भी अपने कंटेंट और विवादों को लेकर सुर्खियों में रहा है। इस बार शो की चर्चा एक अलग वजह से हुई है। तंजानियाई छात्र की बात का छोटा वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हुआ और उसके बाद विदेशी छात्रों को दी जाने वाली सरकारी छात्रवृत्ति बनाम भारतीय टैक्सपेयर्स की प्राथमिकताओं पर बहस शुरू हो गई।
इस विवाद का केंद्र फिलहाल छात्र का बयान है, न कि शो की कॉमेडी या कोई नया आपत्तिजनक जोक।
निष्कर्ष
‘India’s Got Latent’ के वायरल क्लिप ने विदेशी छात्रों को भारत सरकार की ओर से दी जाने वाली स्कॉलरशिप पर नई बहस छेड़ दी है। भारतीय टैक्सपेयर्स का यह सवाल कि सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह और किन लोगों के लिए किया जाना चाहिए, अपनी जगह महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही यह तथ्य भी है कि भारत सरकार की ICCR के जरिए विदेशी छात्रों के लिए बाकायदा छात्रवृत्ति योजनाएं चलती हैं और इनमें मासिक स्टाइपेंड का प्रावधान है।
हालांकि, वायरल वीडियो में दिख रहे तंजानियाई छात्र की सटीक स्कॉलरशिप योजना और उसके द्वारा मां को भेजी गई रकम के नियमसम्मत होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले में सोशल मीडिया के दावों और आधिकारिक तथ्यों को अलग-अलग रखना जरूरी है।
