कोरबा l कहते हैं कलियुग, पर इंसानियत अभी जिंदा है…कोरबा के कुसमुंडा क्षेत्र के गंगानगर की ये खबर आंखें खोल देगी!
कोरबा कुसमुंडा के गंगा नगर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने इस बात को साबित कर दिया कि भले ही कलयुग का दौर कहा जाता हो, लेकिन अब भी कहीं ना कहीं इंसानियत बची हुई है. एक एनटीपीसी रेलवे ट्रैक कर्मी की तत्परता से पूरा सिस्टम सक्रिय हो गया और पानी से तड़प रही गाय के बच्चे को बड़ी राहत मिली.

कहते हैं इंसान अगर थोड़ी संवेदनशील हो गई तो आधे से अधिक सामाजिक मुद्दे सामान्य तौर पर ही सुलझ जाएंगे.कोरबा जिले के कुसमुंडा में जो हुआ वह एक मिसाल बनकर सामने आया है. यहां एक गाय के बच्चे जो कि अपने मां से बिछड़ गई थी, और काफी देर से रेलवे ट्रैक के किनारे पर बैठी थी पानी की प्यास से तड़प रही थी, तभी अचानक एनटीपीसी के गिरधारी लाल जो की रेलवे ट्रैक लाइन के चाभीदार है उनकी नजर पड़ती है गाय के बच्चे के ऊपर उन्होंने पूरा काम का छोड़कर तत्काल उसे गाय के बच्चे के पास पहुंचा और देखा तो गाय की जो बच्चे थे छोटा सा वह काफी तड़प रहा था उन्होंने बिना देरी किए हुए उस गाय के बच्चे को अपने हाथों से उठाया और सबसे पहले उसे रेलवे ट्रैक लाइन से बाहर निकाल कर उसे एक सुरक्षित जगह में ले गए जहां और गायों के बीच में छोड़ा।

और उसे तत्काल बिना देरी किए हुए अपने ही हाथों से पानी पिलाया जिसे देख वहां के लोग हैरान हो गए और उस रेलवे ट्रैक चाभीदार को शाबाशी दी और कहा आपने जो यह काम किया है बहुत ही प्रसन्नता वाली बात है कि आपने अपने ऑन ड्यूटी में होते हुए भी यह नहीं देखा कि और भी कुछ वारदात हो सकती थी लेकिन आपने यह जो पहल उठाया है बहुत ही प्रसन्नता वाली बात है ,गिरधारी लाल के संवेदनशीलता और तत्परता के कारण गाय के बच्चे की जान बच गई और उसकी प्यास बुझी।