📰 मुख्य बिंदु – ननकीराम कंवर का धरना
1️⃣ धरना-प्रदर्शन की योजना
- तारीख: 4 अक्टूबर 2025
- स्थान: मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस), रायपुर
- उद्देश्य: कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत को हटाने की मांग।
- अनुमति: रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह से अनुमति मांगी गई है।


2️⃣ आरोप और शिकायतें
- ननकीराम कंवर ने कहा कि कोरबा कलेक्टर भ्रष्ट और हिटलर प्रशासक की तरह कार्य कर रहे हैं।
- उन्होंने 14 बिंदुओं पर शिकायत मुख्यमंत्री और कई केबिनेट मंत्रियों के सामने रखी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- उनके अनुसार कुछ आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री को वास्तविक जानकारी नहीं दे रहे, जिससे भ्रष्टाचार की जानकारी दबाई जा रही है।
- उन्होंने यह भी कहा कि उनके जैसे वरिष्ठ नेता की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही तो अन्य जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का क्या होगा।

3️⃣ पहले की कार्रवाई
- 22 अगस्त 2025: ननकीराम कंवर ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर कलेक्टर को हटाने की मांग की थी।
- चेतावनी दी थी कि तीन दिन में कार्रवाई नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
- आरोप था कि कलेक्टर के खिलाफ सैकड़ों भ्रष्टाचार के मामले हैं।
4️⃣ धरना का महत्व
- राजनीतिक दबाव: यह कदम कलेक्टर और प्रशासन पर सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव डालने के लिए उठाया गया है।
- जनभावना का प्रतिनिधित्व: कंवर का दावा है कि यह धरना जन भावना को लेकर है।
- प्रशासनिक पारदर्शिता: उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों को दबाना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं।
5️⃣ विश्लेषण
- ननकीराम कंवर भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए उनका धरना राजनीतिक और मीडिया दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व में टकराव चल रहा है।
- 4 अक्टूबर का धरना राजनीतिक मंच पर कोरबा कलेक्टर और प्रशासन की छवि प्रभावित कर सकता है।
🔹 निष्कर्ष
- ननकीराम कंवर कोरबा कलेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार और दमनकारी कार्यशैली को उजागर करने के लिए धरने पर बैठने जा रहे हैं।
- इस कदम से राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों पर असर पड़ सकता है।
- जनता और मीडिया इस धरना-प्रदर्शन को नजर रखेंगे, जिससे सरकार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
