जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ने के साथ अब उनके गुप्त आर्थिक तंत्र की परतें भी खुलने लगी हैं। लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को जंगलों में छिपाकर रखे गए ऐसे डंप मिल रहे हैं, जिनसे माओवादियों की मजबूत आर्थिक व्यवस्था का खुलासा हो रहा है।
बीते तीन महीनों के दौरान सुरक्षा बलों ने अलग-अलग इलाकों से करीब 6 करोड़ 75 लाख रुपये नकद और लगभग 8 किलो सोना बरामद किया है। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और जंगलों में अभी भी बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और अन्य संसाधन छिपे हो सकते हैं।

अंदरूनी इलाकों में छिपाए गए थे डंप
Sundarraj P के अनुसार बरामदगी माओवादियों द्वारा अंदरूनी जंगल क्षेत्रों में बनाए गए गुप्त डंप से हुई है।
सुरक्षा बल लगातार इन इलाकों में सर्चिंग अभियान चला रहे हैं और आशंका है कि आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक माओवादी संगठन केवल हथियारों और कैडर के दम पर नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक नेटवर्क के सहारे भी लंबे समय तक सक्रिय रहा।
नोटबंदी के बाद बदली रणनीति
जानकारों का कहना है कि नोटबंदी के बाद माओवादियों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया था।
पहले संगठन बड़ी मात्रा में नकदी जमा करता था, लेकिन बाद में जोखिम कम करने के लिए सोने में निवेश बढ़ा दिया गया।
अब तक बरामद 8 किलो सोने की कीमत ही लगभग 13 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि संगठन की आर्थिक ताकत कितनी मजबूत थी।
लेवी से खड़ा हुआ आर्थिक नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक माओवादी संगठन वर्षों से तेंदूपत्ता कारोबार, सड़क निर्माण, खनन, सरकारी विकास कार्यों और ठेकेदारों से लेवी वसूलता रहा है।
इसके अलावा ग्रामीणों और व्यापारिक गतिविधियों से भी अवैध वसूली की जाती थी। यही रकम धीरे-धीरे करोड़ों रुपये के नेटवर्क में बदल गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादियों ने जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर नकदी, सोना और हथियार छिपाकर रखे थे ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके।
50 करोड़ से ज्यादा छिपी पूंजी का अंदेशा
वरिष्ठ पत्रकार Rajendra Tiwari का मानना है कि अब तक बरामद रकम केवल सतही हिस्सा है।
उनके अनुसार केवल बस्तर क्षेत्र में ही माओवादियों की छिपी पूंजी 50 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे माओवादी नेटवर्क कमजोर हो रहा है, वैसे-वैसे उसका आर्थिक साम्राज्य भी सामने आ रहा है।
सिर्फ हथियार नहीं, आर्थिक रीढ़ पर भी वार
सुरक्षा बलों का मौजूदा अभियान अब केवल हथियारों और कैडर की तलाश तक सीमित नहीं है।
ऑपरेशन का बड़ा उद्देश्य माओवादियों की आर्थिक रीढ़ को तोड़ना भी है, क्योंकि इसी फंडिंग के सहारे संगठन वर्षों तक अपनी गतिविधियां चलाता रहा।
अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में अब भी कई गुप्त डंप छिपे होने की आशंका है और आने वाले दिनों में सर्च ऑपरेशन और तेज किए जाएंगे।
बस्तर में लगातार जारी है अभियान
Bastar में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार एंटी-माओवादी ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
इन अभियानों के चलते कई बड़े माओवादी ठिकाने ध्वस्त किए गए हैं और संगठन को आर्थिक तथा रणनीतिक दोनों स्तर पर नुकसान पहुंचा है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फाइनेंशियल जांच में जुटी हुई हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध वसूली की रकम कहां-कहां छिपाई गई थी और इसमें कौन-कौन शामिल था।

