रायपुर।
छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर और डीएसपी रुस्तम सारंग ने आधिकारिक रूप से खेल जगत से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए खेल प्रशिक्षण और सभी खेल गतिविधियों से खुद को अलग करने की घोषणा की है।

🔹 उपेक्षा से आहत होकर लिया फैसला
रुस्तम सारंग के पोस्ट से साफ झलकता है कि वे लंबे समय से खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि—
“आज से अभी से खेल प्रशिक्षण और खेल की सभी गतिविधियों से मैं संन्यास की घोषणा करता हूं। भविष्य में मैं किसी प्रकार के खेल प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों में सम्मिलित नहीं रहूंगा। कुछ दिनों से लगातार महसूस कर रहा हूं कि मेरे 24 वर्षों के खेल अनुभव की अब राज्य या समाज को जरूरत नहीं है, इसलिए मैं खेल प्रशिक्षण, खिलाड़ियों और खेल गतिविधियों से संन्यास की घोषणा करता हूं। जय जोहार।”
उनके इस बयान ने खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों को झकझोर कर रख दिया है।
🔹 छत्तीसगढ़ के सम्मानित खिलाड़ी
रुस्तम सारंग केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास का गौरव रहे हैं। राज्य सरकार उन्हें छत्तीसगढ़ के सर्वोच्च खेल अलंकरणों से सम्मानित कर चुकी है—
- 2006–07 : शहीद कौशल यादव खेल पुरस्कार
- 2007–08 : शहीद राजीव पाण्डेय खेल पुरस्कार
- 2009–10 : गुंडाधुर सम्मान
ये सम्मान उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।
🔹 एक नजर में रुस्तम सारंग की प्रमुख उपलब्धियां
रुस्तम सारंग ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का नाम रोशन किया—
- 2006 – जूनियर नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप : 🥇 गोल्ड
- 2006 – सीनियर नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप : 🥉 ब्रॉन्ज
- 2006 – नेशनल गेम्स, गुवाहाटी : 🥈 सिल्वर
- 2007 – ऑल इंडिया पुलिस गेम्स : 🥇 गोल्ड
- 2009 – कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप, मलेशिया : 🥇 गोल्ड
- 2011 – वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप : 🥇 गोल्ड (ओलंपिक क्वालिफायर)
- 2014 – वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप : 🥇 गोल्ड (ओलंपिक क्वालिफायर)
- 2015 – केरल नेशनल गेम्स : 🥇 गोल्ड
🔹 खेल जगत में मायूसी
रुस्तम सारंग जैसे अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी का खेल प्रशिक्षण से अलग होना छत्तीसगढ़ के उभरते खिलाड़ियों के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि उनके अनुभव से नई पीढ़ी को काफी लाभ मिल सकता था।
अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार और खेल विभाग इस फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या रुस्तम सारंग को फिर से खेल गतिविधियों से जोड़ने की कोई पहल होती है या नहीं।

